गुरुवार, 28 जनवरी 2010

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

 

 

 

 
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शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

ईश्वर के साथ प्रश्नोत्तर

स्वप्नावस्था से जागृति की ओर ईश्वर के साथ

प्रश्नोत्तर:-

(परिस्थितियाँ): बहन गई, माँ सो गई, बच्चे भी अब मुकर गये;

(प्रश्न:) कई विरोधी देते हैं ललकार, मुझे उठना है ?

इतनी विषम परिस्थितियों में भी मुझे उठाना है प्रभु ??

(उत्तरः) नहीं, तू तो कुछ भी नहीं,,,मेरे हाथों के हथियार ! तुझे उठना है।१।

(समस्या): उठना है ? चलना है ??

( उत्तर: ) हाँ, हाँ,, एम्बुलेंस की नही जरूरत, अब बेलेंस बनाओ;

चलने में, सब कुछ करने में, समता ही अपनाओ ।।

(अन्तर्द्वन्द्व ): फिर भी केहरि-नाद इसी समरांगण में ?

(उत्तरः) हाँ, अरे पितामह! तुझको ही करना होगा,

....मेरी ताकत की तलवार ! तुझे चलना होगा ।।२।।

(वास्तविकता): लो, स्वीकारो,

इन मोतियन को निकले अन्तर से (आत्म-समर्पण);

(ईश्वरेच्छा): नहीं, नहीं गिरने दूँगा,, बस ले लूँगा अन्तर से,

भींगी पलकों से गालों तक, मेक-अप तेरा करूँगा,,

शुष्कानन को मात्र देख मत; उठ, चल, सब करना है,

साथ भले ना दे शरीर पर; ईश्वर साथ रहेगा ।।३।।(आत्म-विश्वास); मेरे हाथों के हथियार ! तुझे उठना है,

मेरी ताकत की तलवार ! तुझे चलना है ।।

(मूकं करोति वाचालम्):

वाह् प्रभु वाह !! क्या करवायेंगे ? कुछ भी पता नही है,

क्या होना है, क्या करना है, कुछ भी पता नही है;

जितनी भी सेवा लेनी हो, इस तन-मन से ले लो ।

लौट आया कर्तव्य-पथिक अब जो चाहो करवालो।।

हरि उठेगा, हरि चलेगा,, केहरि-नाद बजेगा ।

साथ भले ना दे शरीर पर ईश्वर साथ रहेगा ।। ४ ।।

मेरी ताकत की तलवार ! तुझे चलना होगा ..............

(फिर एक विचार उठा): शारदीय नव-रात्र, शारदा आवाहन है ?

(सच है):-''ऋषीणां पुनराद्यानां वाचम् अर्थो'नुधावति””

द्वापर-युग का खेशशिगुण आरोहणाब्द है,

शारदीय नवरात्र आज ये कवि का दिन है ।।

हरि उठेगा, हरि चलेगा,, केहरि-नाद बजेगा;

साथ भले ना दे शरीर पर ईश्वर साथ रहेगा.

२५ सितम्बर २००९ श्रीकृष्णार्पणमस्तु

सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

मङ्गलं

अहङ्कारः कुतो यातो बुद्ध्या नैव विचिन्वते । चित्तप्रसुप्तिः सञ्जाता तुरीयान्तर्गतं मनः ॥१॥

चिदानन्दार्णवे मग्नं मनः क्वापि न सज्जते । यत् किञ्चिज्जायते तत्तु मया नैव प्रबुध्यते ॥२॥

को/हं जाने नात्र शम्भो शिवः साक्षाच्छिवः शिवः।मङ्गलं तन्वते नित्यं विश्वस्मिञ्जगति स्थितौ ॥३॥


रविवार, 28 दिसंबर 2008

२००९ वर्ष

शतं जीव शरदो वर्धमानः
२००९ वर्ष, किसी एक मानव का ?
हम क्यों मनाएं ? इस वर्ष की विशेषता ?
हमारा भी अपना कोई वर्ष तो है
मैं क्यों मनाऊं ?
मैं कौन ? आत्म चिंतन, नही ; चिंतित भी क्यों ? मै तो .......
अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो विभुर्व्याप्य सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्
सदा मे समत्वं न मुक्तिर्न बन्धः चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽ हम् ॥
चिति शक्ति के साथ
साथ सबको आनंद कराते रहना, २+०+०+९=" नो दो ग्यारह" ??

बुधवार, 10 दिसंबर 2008

तेरे पूजन को भगवान

तेरे पूजन को भगवान , बना मन-मन्दिर आलीशान :ध्रुव पद:
तू इसमें बैठा रहता है, निश-दिन काम करा लेता है
तेरी गरिमा
के गुण-गान, गाऊं दिल से मन में जानतेरे पूजन को भगवान ******
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया
तेरी लीला ईश महान, कराता नये नवेले कामतेरे पूजन को भगवान *********
मैने जानी तोरी माया , मैने भेद आपका पाया ॥
आप हो सच्चाई की खान, सदा
रहते हो अंतर्ध्यान ॥ ३॥ तेरे पूजन को भगवान ************
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